भारत में मुंह और गले के कैंसर के मामले सबसे अधिक होते हैं। इन दोनों ही कैंसर के इलाज के बाद मरीज के चेहरे व गाल के आकार में गड़बड़ी और इन अंगों को काम करने में दिक्कत आने लगती है। लेकिन अब मेडिकल साइंस में उपलब्ध उच्च तकनीकों की सहायता से इस विकृति को आसानी से ठीक किया जा सकता है। आइए जानते हैं इसके बारे में।

फ्री-फ्लैप तकनीक -
इस तकनीक में मरीज के हाथ, जांघ व पैर से मांसपेशी, रक्तवाहिनी, हड्डी, ऊत्तक और त्वचा लेकर विकृत अंग को दोबारा बनाकर सही किया जाता है। इस तकनीक में अंग को फिर से सक्रिय बनाने का प्रयास होता है।

जबड़ा : तंबाकू व गुटखा खाने की वजह से होने वाले मुंह के कैंसर के ज्यादातर मामलों में जबड़े को निकालना पड़ता है ताकि कैंसर कोशिकाएं मुंह से जुडे़ अन्य अंगों में न फैले। लेकिन इससे चेहरे के आकार में विकृति आ जाती है। एेसे में फ्री-फ्लैप तकनीक से पैर की फिब्यूला हड्डी (शरीर का भार उठाने में इस हड्डी की विशेष भूमिका नहीं होती इसलिए इसके प्रयोग से बॉडी पर कोई खास असर नहीं पड़ता) से नया जबड़ा बनाया जाता है। इलाज के बाद मरीज आसानी से अपने भोजन को खा पाता है।

जीभ: इस अंग में कैंसर होने पर कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं जिसकी वजह से कुछ हिस्सों को हटाना पड़ता है। इसके लिए जांघ से त्वचा लेकर नई जीभ बनाई जाती है। 7-10 दिन बाद मरीज को छुट्टी दे दी जाती है।
गाल: कैंसर में गाल की त्वचा लचीलापन खोकर विकृत हो जाती है। इसके लिए हाथ के अग्र भाग से त्वचा लेकर इसे तैयार किया जाता है।
फॉलोअप: शुरुआती छह महीनों में डॉक्टर को हर माह दिखाना होता है इसके बाद तीन माह के अंतराल में फॉलोअप के लिए बुलाया जाता है।



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