पूरी दुनिया इस समय कोरोना वायरस के खौफ में हैं। चीन, इरान, इटली के बाद अब भारत में भी कोरोना वायरस अपने पैर पसार रहा है। भारत में इस वायरस से पीड़ित करीब 50 से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। परंतु इससे छुटकारा कब मिलेगा शायद इसका जवाब किसी के पास नहीं है। ऐसे में ज्योतिषशास्त्र की मदद से हम ग्रहों की स्थिति को जानकर इस वायरस व शेयर बाजार में मजबूती का पता लगा सकते हैं। आखिर कब तक हमें इन समस्याओं से छुटकारा मिलेगा। तो आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य आलोक पंड्या क्या कहते हैं इस बारे में...

 

कोरोना वायरस से कब मिलेगी देश को मुक्ति, जानें क्या कहती है ग्रहों की चाल

इन ग्रहों के कारण फैला वायरस

ज्योतिषाचार्य आलेक पंड़्या का कहना है की कोई भी माहामारी हो वो वायरस के कारण ही फैलती है। ज्योतिष के अनुसार वायरस के कारण फैलने वाली महामारी के कारक दो ग्रह राहु और केतु माने जाते हैं। वहीं देवगुरु बृहस्पति को जीव व अर्थव्यवस्था का कारक ग्रह माना जाता है और शनि को आम जनता का कारक ग्रह माना गया है। इसलिये जब भी ये ग्रह गोचर के दौरान पीड़ित होते हैं यानी किसी बड़े ग्रहण के समय, पीड़ा में होते हैं तब इसी तरह की महामारी फैलती है और आम जनता को कष्ट मिलता है।

 

कोरोना वायरस से कब मिलेगी देश को मुक्ति, जानें क्या कहती है ग्रहों की चाल

धनु राशि में पड़े ग्रहण और इन ग्रहों की युती से फैली महामारी

कोरोना वायरस का प्रकोप दुनिया के करीब 100 से अधिक देशों में फैल चुका है। इसकी शुरुआत तब से हुई जब धनु राशि में पड़े ग्रहण के बाद चीन के वुहान शहर से फैले कोरोना वायरस ने अब वैश्विक महामारी का ले लिया है। वहीं धनु राशि में देवगुरू बृहस्पति की केतु के साथ युति बन रही है। जिसके कारण समस्त जीव इससे पीड़ित हैं।

 

शेयर बाजार में मंदी कब तक

अप्रैल के महीने से सोने के कारक ग्रह गुरु के अपनी नीच राशि में होने के कारण इस कीमती धातु के दामों में तेजी आएगी। पेट्रोल और डीजल के कारक शनि अपनी राशि मकर में रहकर पेट्रोलियम की कीमत में गिरावट लाएंगे। फिलहाल मकर राशि में गोचर कर रहे गुरुदेव स्टॉक मार्केट में कहर बरपा रहे हैं। वैसे ये मंदी का दौर 1989, 2002 और 2009 में गुरु की शनि के साथ युति या समसप्तक योग के दौरान देखा जा चुका है।

 

ये 2 ग्रह दिलायेंगे भारत को कोरोना से मुक्ति

22 मार्च की रात मंगल धनु राशि में केतु के चंगुल से आजाद होकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसके कुछ दिन बाद ही 30 मार्च को गुरु भी केतु का साथ छोड़कर मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे। इन दोनों बड़े ग्रहों का केतु की युति से मुक्त होकर मकर राशि में चले आना कोरोना वायरस के प्रकोप को कुछ कम करेगा। भारत के लिए स्थिति विशेषरूप से राहत देने वाली होगी क्योंकि आजाद भारत की कुंडली में मकर राशि नवम स्थान में पड़ती है जो कि एक शुभ भाव है।

वृषभ लग्न की भारत की कुंडली में नवम भाव में आकर मंगल और गुरु की शनि से युति होगी जो कि महामारी के रूप में फैले कोरोना के प्रकोप को कम करेंगे। बाद में 14 अप्रैल को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश और 26 अप्रैल को बुध के भी मेष राशि में आकर सूर्य से युति करने के साथ तापमान में तेजी से वृद्धि होगी और भारत को कोरोना के कहर से मुक्ति मिल जाएगी। लेकिन यूरोप, चीन और अमेरिका में कोरोना का असर केतु के आगामी सितंबर महीने में धनु राशि में गोचर करने तक बना रह सकता है।

 



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