सुदर्शन सोलंकी

वातावरण में बढ़ी हुई कार्बन डाईऑक्साइड महासागरों में भी अवशोषित हो जाती है और गहरे समुद्रों में जमा हो जाती है, जो वर्षों तक वहां रहती है। दक्षिणी महासागर कार्बन डाईऑक्साइड को वायुमंडल से बाहर निकालने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कार्बन डाईऑक्साइड और दूसरे खतरनाक अपशिष्टों को महासागर आसानी से अपने में सम्मिलित कर लेते हैं, परन्तु अब इनका अस्तित्व खतरे में है। एक रिपोर्ट के अनुसार पिछली दो शताब्दियों में 525 अरब टन कचरा महासागरों में गया है। इसके अलावा मानवीय गतिविधियों के कारण निकली कार्बन डाईऑक्साइड का करीब आधा हिस्सा भी समुद्र में समा गया है, जिससे खतरा बढ़ गया है।

वैज्ञानिकों के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण अंटार्कटिक के चारों ओर फैले दक्षिणी महासागर में कार्बन डाईऑक्साइड सोखने की क्षमता पर गहरा संकट मंडरा रहा है। इससे वातावरण में कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा बढऩे का खतरा बढ़ता जा रहा है। एक शोध के मुताबिक ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे, यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंगलिया और मैक प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर बॉयोजियोकेमिस्ट्री के वैज्ञानिकों का कहना है कि दक्षिणी महासागर कार्बन डाईऑक्साइड से पूरी तरह भर गया है। अब इसमें इतनी कार्बन डाईऑक्साइड आ गई है कि सागर इसे सोखने की बजाय वापस वातावरण में छोड़ रहा है। अगर इसे रोका नहीं गया तो दुनिया का तापमान तेजी से बढ़ेगा। यदि हम वैज्ञानिकों की चेतावनी पर भरोसा करें, तो आने वाला समय मानव ही नहीं, बल्कि समस्त जीव-जंतुओं के अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न होगा। इसलिए समुद्र को प्रदूषण से बचाने की लिए हमें ठोस प्रयास करने होंगे। नदियों के माध्यम से औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला रसायन और घरेलू दूषित जल बड़ी मात्रा में समुद्रों में मिलता है। उसे समुद्रों में मिलने से पहले ही स्वच्छ कर लिया जाए।

(लेखक विज्ञान विषयों पर निरंतर लेखन करते हैं)



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