कोलकाता. राजनीति में कोई किसी का स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता है। समय और हालात के मुताबिक राजनीतिक समीकरण बनते बिगड़ते रहते हैं। एक दूसरे को फूटी आंख भी नहीं सुहाने वाले सत्ता के लिए हाथ मिला लेते हैं। इस बार के लोकसभा चुनाव में इसका सबसे बड़ा उदाहरण उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा में गठबंधन है। २४ साल बाद सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव और बसपा प्रमुख मायावती न सिर्फ एक मंच पर नजर आए, बल्कि एक दूसरे के लिए वोट भी मांगे। इधर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी तथा पीएम नरेन्द्र मोदी के बीच महामुकाबला किसी से छिपा नहीं है। नोटबंदी से लेकर जीएसटी तथा केन्द्र की कई योजनाओं को लागू करने से मना करके ममता पहले से मोदी के खिलाफ हमलावर हैं। चुनाव प्रचार के दौरान सीएम ममता और पीएम मोदी एक दूसरे पर खूब सियासी बाण छोड़ रहे हैं। इस बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार को दिए एक साक्षात्कार में यह खुलासा कर कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हर साल उन्हें कुर्ते और मिठाइयां भेजती हैं, ने सबको चौंका दिया है। हालांकि ममता ने साफ कर दिया है कि वह मोदी को उपहार भेजी होंगी, लेकिन वह उन्हें वोट कतई नहीं देंगी।
अब सवाल है कि तीन चरण के लोकसभा चुनाव के बाद मोदी ने इसका खुलासा क्यों किया? राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इस बयान के पीछे कोई बड़ा राज है। कुछ का मानना है कि इस चुनाव में भाजपा की स्थिति वर्ष 2014 के चुनाव जैसी नहीं है। यूपी में मोदी के खिलाफ जबर्दश्त मोर्चाबंदी दिख रही है। यूपी को भाजपा को १० से १५ सीटों का नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में मोदी ने ममता के संबंध में यह खुलासा कर रिश्तों में आई तल्खी को कम करने का प्रयास किया है ताकि बहुमत नहीं आने की स्थिति में दीदी की मदद ली जा सके। पश्चिम बंगाल में लोकसभा की 42 सीटें हैं। लोकसभा सीटों के हिसाब से यह तीसरा बड़ा राज्य है। ऐसे में बंगाल को साधना किसी भी नेता के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।



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