कहावत है कि योग भगाए रोग। बात सच है, यदि सही तरीके से योग किया जाए तो विशेषज्ञ कहते हैं कि अधिकांश बीमारियों से दूर रहेंगे। योग हाई ब्लड प्रेशर, आर्थराइटिस, अस्थमा में कारगर है। गलत तरीके से करने के कारण इसकेे अपेक्षाकृत परिणाम नहीं मिलते हैं। योग संस्कृत शब्द के युज से बना है। इसका अर्थ है जुडऩा। योग मानसिक-शारीरिक संतुलन बनाकर आंतरिक व बाहरी रोगों को दूर करता है। पूरे शरीर की कार्यप्रणाली को सुचारु करने में यह सहायक है। योग विशेषज्ञ के निर्देशन, प्रशिक्षण लिए बिना अपने मन से योगासन न करें।
बच्चे : 10 वर्ष की उम्र के बाद करें
10 वर्ष की उम्र के बाद ये योगासन शुरू करें। बच्चों में एकाग्रता, रोग प्रतिरोधक क्षमता व लम्बाई भी बढ़ाने में कारगर है।
1. वज्रासन व पद्मासन से एकाग्रता बढ़ती
ऐसे करें : इसमें दोनों पैरों को पीछे मोड़कर पंजों पर बैठकर जांघों पर हाथ रखते हैं। साथ ही, कमर सीधी व आंख बंद कर ध्यान लगाते हैं।
अद्र्धपद्मासन करें : सुखासन में बैठकर एक-दूसरे पैर की जांघ पर रखते हैं। ऐसा न कर पाएं तो अद्र्धपद्मासन की मुद्रा में भी बैठ सकते हैं।
2. तितली व ताड़ासन से शरीर बनता मजबूत
जमीन पर बैठकर पैरों के तलवों को जोड़ें। घुटनों को तितली के पंखों की तरह ऊपर-नीचे करें। ऐसा 2-5 मिनट कर सकते हैं।
ताड़ासन : पैरों के पंजों पर खड़े होकर हाथों को ऊपर की ओर उठाएं। साथ ही, पूरे शरीर को ऊपर की खींचते हुए कुछ देर तक सांस रोकें।
3. नियमित अभ्यास से दिमाग तेज होता
नाड़ी शोधन : दायीं नासिका से सांस लेकर बायीं नासिका से निकालें।
भ्रामरी : अंगूठे से कान बंद करें। तर्जनी से आंख, मध्यमा से नाक के पास, अनामिका को ऊपर वाले होंठ व कनिष्ठा अंगुली निचले होंठ के नीचे रखें। नाक से सांस अंदर लेकर भंवरे की तरह गुंजन करते हुए निकालें।
युवा : युवाओं की खराब सेहत के पीछे बिगड़ती जीवनशैली व गलत खानपान प्रमुख वजह है। तनाव, अवसाद से युवा ग्रसित हो रहे हैं।
1. पश्चिमोत्तासन से शरीर का लचीलापन बढ़ता
पैरों को सीधा कर सामने जमीन पर फैलाएं। स्वांस लेते हुए दोनों हाथों को आगे की ओर झुकते हुए दोनों हाथों से अंगूठे पकडं़े और सिर को घुटनों से लगाएं। इससे एसिडिटी, दर्द, मरोड़ अपच की समस्या दूर होती है। जिनका शरीर लचीला न हो वे तेजी में इसे न करें।
2. अद्र्ध मत्सेन्द्रासन किडनी के लिए फायदेमंद
दाएं पैर के पंजे को कूल्हे के पास लाकर बाएं पैर के पंजे को दाएं घुटने के पीछे रखें। गर्दन को बाएं पैर की तरह क्षमतानुसार पीछे की ओर ले जाएं। फिर दाएं हाथ से बाएं पैर के पंजे को पकड़ लें। फेफड़े, किडनी व पाचन के लिए फायदेमंद है। गर्दन और कमर दर्द में यह आसन न करें।
3. हलासन से भूख बढ़ती, मांसपेशियां मजबूत
शरीर की स्थिति हल की तरह बनने के कारण इसे हलासन कहते हैं। लेटकर हाथों को जमीन से टिकाएं। पैरों को उठाते हुए सिर के पीछे तक ले जाएं। भूख बढ़ती, पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। अधिक वजन, पेट और कमरदर्द, मिर्गी से पीडि़त व्यक्ति बिना विशेषज्ञ की सलाह न करें।
बुजुर्ग : 60-70 की उम्र में हल्के व्यायाम, हास्य योग करें।
1. सूक्ष्म यौगिक कियाएं करें
जोड़ों के दर्द से आराम : हाथ-पैर, गर्दन, कंधे आदि को धीरे-धीरे ऊपर-नीचे, आगे-पीछे और गोल घुमाएं। जोड़ों में अकडऩ दूर होगी साथ ही दर्द भी कम होगा। आप सेहतमंद हैं तो कुछ व्यायाम दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं लेकिन किसी रोग से पीडि़त हैं तो बिना विशेषज्ञ की सलाह से योग न करें।
2. शवासन से थकान भगाएं
जमीन पर सीधा लेट जाएं। शरीर को ढीला छोड़ें। कुछ देर इसी अवस्था में बने रहें।
सांस संबंधी क्रियाएं: गहरी सांस लेकर छोडऩी की प्रक्रिया करें। तनाव और थकान दूर होते हैं शरीर के हर अंग को कुछ समय के लिए आराम मिलता है। झटके से लेटने या उठने से बचें। कमजोर हड्डियां हैं तो क्षतिग्रस्त हो सकती हैं।
3. हास्य योग देता एनर्जी
घर, मैदान या खुली जगह पर खुलकर हंसने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है। कोशिकाएं रिलैक्स होने लगती हैं जिससे व्यक्ति मानसिक रूप से अच्छा महसूस करता है। नियमित लाफ्टर थैरेपी से मानसिक सेहत बरकरार नहीं रहती, इसके लिए घर और आसपास का माहौल सकारात्मक होना चाहिए।
योग विशेषज्ञ- डॉ. गौतम शर्मा, प्रोफेसर, हृदय रोग विभाग एम्स, नई दिल्ली
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