नई दिल्ली। युद्ध , उत्पीड़न और संघर्ष से भागे लोगों की संख्या बीते साल विश्व स्तर पर 70 लाख से अधिक हो गई। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के लगभग 70 वर्षों के संचालन में यह सबसे बड़ा आंकड़ा है। एजेंसी की वार्षिक ग्लोबल ट्रेंड्स की रिपोर्ट के अनुसार लगभग 70.8 लाख लोग जबरन विस्थापित हुए हैं जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.3 लाख से अधिक है।
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उत्पीड़न से सुरक्षा को चाहने वाले लोगों की संख्या अधिक
संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त, फिलिपो ग्रांडी का कहना है कि वह इन आंकड़ों में जो देख रहे हैं, वह युद्ध, संघर्ष और उत्पीड़न से सुरक्षा को चाहने वाले लोगों की संख्या है। गौरतलब है कि शरणार्थियों और प्रवासियों के आस-पास की भाषा और माहौल अक्सर विभाजनकारी होता है। यह संख्या दुनिया की आबादी के अनुपात के रूप में विस्थापित लोगों की संख्या में तेज वृद्धि का भी प्रतिनिधित्व करती है। यह आंकड़ा बीते साल शिखर पर था। 1951 में संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के बाद से 1992 में प्रति 1,000 की जनसंख्या पर 3.7 प्रतिशत लोग विस्थापित हुए। 2018 तक, यह संख्या दोगुनी से अधिक क हो गई थी।
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वास्तविक आंकड़ा अधिक होने की संभावना
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2018 के आंकड़े और अधिक होने की संभावना है। वेनेजुएला संकट से विस्थापित लोगों की संख्या के सभी आंकड़े सामने नहीं आए हैं। लगभग चार लाख लोग वेनेजुएला छोड़ कर निकल गए हैं। यह रिपोर्ट दो मुख्य समूहों की पहचान करती है। सबसे पहले शरणार्थी लोगों की, संघर्ष, युद्ध या उत्पीड़न के कारण अपने देश को छोड़ने के लिए मजबूर लोगों की।
दूसरा समूह शरण चाहने वालों का है। ये जन्मस्थल वाले देश से बाहर के लोग हैं जो अंतर्राष्ट्रीय संरक्षण में हैं, लेकिन उन्हें शरणार्थी का दर्जा दिया जाना बाकी है। दुनिया भर में दो तिहाई से अधिक शरणार्थी सीरिया, अफगानिस्तान, दक्षिण सूडान, म्यांमार और सोमालिया से हैं। सीरिया में शरणार्थियों की संख्या 6.7 लाख के साथ सबसे अधिक है। इसके बाद अफगानिस्तान में 2.7 लाख शरणार्थी हैं।
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