आज शनिवार 24 अगस्त को भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भादो मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र ( Janmashtami shubh suhurat ) में मनाया जाएगा। हर साल जन्माष्टमी का पर्व रोहिणी नक्षत्र में ही मनाया जाता है। हिंदू पंचाग के अनुसार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का महापर्व 24 अगस्त दिन शनिवार को ही भादो मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि एवं रोहिणी नक्षत्र है। आज 24 अगस्त शनिवार को जन्माष्टमी के पावन अवसर पर इस शुभ मुहूर्त में ऐसे करें कान्हा जी का पूजन।
जन्माष्टमी पर्व शुभ मुहूर्त
आज 24 अगस्त दिन शनिवार को सूर्योदय से कुछ समय पहले ही रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ हो गया है। तदनुसार अष्टमी तिथि प्रातः 8 बजकर 33 मिनट तक एवं शुभ रोहिणी नक्षत्र मध्य रात्रि के बाद भी 25 अगस्त रविवार की सुबह 4 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। शास्त्रों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने भादो मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्य रात्रि में रोहिणी नक्षत्र में ही जन्म लिया था। इसलिए श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव जन्माष्टमी पर्व भी जिस रात्रि में रात 12 बजे रोहिणी नक्षत्र का शुभ योग बन रहा हो तभी मनाना शुभ माना जाता है।
इसलिए जन्माष्टमी का महापर्व शनिवार 24 अगस्त 2019 को अष्टमी व रोहाणी नक्षत्र के शुभ संयोग पर ही जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इसी दिन रात में 11 बजकर 56 मिनट से लेकर कृष्ण जन्म के शुभ समय मध्य रात्रि तक विधि-विधान से योगेश्वर श्रीकृष्ण का पूजन अर्चन करें और उनकी कृपा के अधिकारी बनें।
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ऐसे करें कान्हा जी का जन्म पूजन
आज के दिन जन्माष्टमी के दिन व्रत पूजा का संकल्प ले एवं स्नानादि से निवृत्त होकर सुबह के समय इस मंत्र का 108 बार जप भी सुविधानुसार कामना पूर्ति के भाव से करें।
मंत्र
ममखिलपापप्रशमनपूर्वक सर्वाभीष्ट सिद्धये।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रतमहं करिष्ये॥
- दोपहर के समय इस का उच्चारण करते हुए विधिवत माता देवकी का पूजन करें, एवं पूजन पूर्ण होने के बाद निम्न मंत्र से पुष्पांजलि अर्पण करें।
मंत्र
‘प्रणमे देव जननी त्वया जातस्तु वामनः।
वसुदेवात तथा कृष्णो नमस्तुभ्यं नमो नमः।
सुपुत्रार्घ्यं प्रदत्तं में गृहाणेमं नमोऽस्तुते।।
ऐसे करें कान्हा जी की पूजा
- मध्य रात्रि में ठीक 12 बजे किसी कृष्ण मंदिर में या अन्यत्र जहां उत्सव मनाया जा रहा हो, या फिर अपने घर पर ही जन्म समय से पूर्व कृष्ण भजन कीर्तन करने के बाद नियत समय पर पंचामृत से बाल गोपाल रूप श्रीकृष्ण को पंचामृत स्नान कराकर विधिवत पूजन करें। कृष्ण जन्म की आरती करने के बाद उन्हें माखन मिश्री एवं पंजीरी का भोग लगावें। जन्माष्टमी के दिन उपवास रखने वाले कृष्ण भक्त इसी समय अपना व्रत भी खोल सकते हैं।
।।ऊँ श्री कृष्णाय नमः।।
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