वाशिंगटन। अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने इराक के राष्ट्रपति बरहम सलीह से फोन पर बात कर उत्तर-पूर्वी सीरिया में चल रहे तुर्क सैन्य अभियान और इराक में वर्तमान स्थिति पर चर्चा की। अमरीकी विदेश विभाग ने इस बारे में जानकारी दी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दोनों नेताओं ने तुर्की के सैन्य अभियान पर चिंता व्यक्त की।
अमरीका द्वारा तुर्की पर प्रतिबंध लगाने के बाद हुई बात
नेताओं ने कहा कि अंकारा को इसे तुरंत रोकने की जरूरत है। आपको बता दें कि यह फोन वार्ता अमरीका द्वारा तुर्की पर प्रतिबंध लगाने के बाद हुई है। अमरीका ने सीरिया पर तुर्की के सैन्य अभियान के कारण उस पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके साथ ही तुर्की के वरिष्ठ अधिकारियों को ब्लैक लिस्ट में डालने और तुर्की के साथ द्विपक्षीय व्यापारिक समझौते रद्द करने के ऐलान किए हैं। अमरीका ने तुर्की से आने वाले स्टील पर आयात शुल्क में भी बढ़ोत्तरी कर दी है।
रूस ने भी तुर्की की इस कार्रवाई पर दिया बयान
रिपोर्ट में कहा गया है कि वार्ता के दौरान पोम्पियो ने इराक में हाल ही में हुई हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाएगा। दूसरी तरफ रूस ने भी तुर्की की इस कार्रवाई पर चुप्पी तोड़ी है। रूस ने कहा है कि वह तुर्की सेना और सीरियाई बलों की झड़प रोकने के लिए प्रतिबद्ध है।
तुर्की को सीरिया में सेना स्थापित करने का हक नहीं
सीरिया में रूस के विशेष राजदूत ने इस हिंसा पर बयान जारी किया। उन्होंने कहा,'यह अस्वीकार्य होगा ...और इसलिए हम इसे, निश्चित रूप से अनुमति नहीं देंगे।'उन्होंने कहा कि,'पिछले समझौतों के तहत तुर्की सीरिया में केवल 5-10 किमी (3-6 मील) भीतर ही जा सकता है। 30 किमी "सुरक्षित क्षेत्र" अंकारा की ओर से प्रस्तावित है। तुर्की के पास देश में (सीरिया में) स्थायी रूप से अपनी सेना तैनात करने का कोई अधिकार नहीं है। संघर्ष से बचने के लिए सीरिया तुर्की के संपर्क में है।' आपको बता दें कि रूस सीरियाई नेता बशर अल असद का सबसे प्रमुख सहयोगी है।
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