प्रो. सीएस बरला, जाने-माने अर्थशास्त्री
वर्ष 2020 में विश्व के ज्यादातर देशों को कोरोना महामारी की त्रासदी झेलनी पड़ी। अब हालांकि कोविड का प्रभाव काफी कम हो गया है तथा हमारी अर्थव्यवस्था तेजी से पटरी पर लौट रही है, फिर भी अनेक गंभीर चुनौतियां हैं। यह सही है कि समाज के प्रत्येक वर्ग की समस्याएं भिन्न हैं तथा इस कारण सभी की बजट से अपेक्षाएं भी भिन्न होना आवश्यक है। यह भी सही है कि वित्त मंत्री को देश की सुरक्षा, आधारभूत ढांचा विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा गरीब कल्याण आदि की दृष्टि से संसाधन भी जुटाने होते हैं। इस कारण बजट प्रस्तावों में समाज के सभी वर्गों को समान रूप से संतुष्ट करना संभव नहीं हो पाता।
एक फरवरी को वित्त मंत्री ने जो बजट प्रस्तुत किया है, उसमें कई महत्त्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। वर्ष 2021-22 का बजट स्वास्थ्य सेवाओं को समर्पित नजर आता है। इस वित्त वर्ष में न केवल जिला स्तर तक (६८२ जिलों में) स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाया जाएगा, अपितु राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अन्तर्गत प्रयोगशालाओं की भी व्यवस्था की जाएगी। सम्पूर्ण वित्त वर्ष में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 2.23 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। वित्त मंत्री ने इस बजट को आपदा में अवसर वाले बजट की संज्ञा दी है। 2020 में विनिर्माण क्षेत्र के लिए आरम्भ की गई उत्पाद सम्बद्ध प्रोत्साहन योजना को चालू रखने का भी वचन दोहराया है। इसी के अन्तर्गत वस्त्र उद्योग के द्रुत विकास के लिए अगले तीन वर्षों में सात बड़े टैक्सटाइल पार्क बनाने का प्रस्ताव भी दिया गया। ढांचागत विकास, यानी इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के महत्त्व को देखते हुए वित्त मंत्री ने यह संकेत दिया है कि इसके लिए दीर्घकालीन ऋण के माध्यम से 5 लाख करोड़ रुपए की व्यवस्था की जाएगी। ढांचागत विकास हमारे उद्योगों को संबल देने के अतिरिक्त रोजगार का भी सृजन करेगा।
यहां यह उल्लेख भी करना होगा कि जिन राज्यों में 2021 में चुनाव हो रहे हैं, उनमें हाइवे विकास की परियोजनाओं को प्राथमिकता से लागू किया जाएगा। तमिलनाडु, केरल तथा असम में आर्थिक कॉरिडोर का भी प्रस्ताव रखा गया है। वित्त मंत्री ने देश से यह वादा किया है कि 2023 तक ब्रॉडगेज लाइनों का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण कर दिया जाएगा। ऊर्जा क्षेत्र में 2021-22 में दो उल्लेखनीय प्रस्ताव दिए गए हैं :
(अ) निजी-सार्वजनिक माध्यम के तहत हाइड्रो ऊर्जा नीति लागू की जाएगी।
(ब) जिन राज्यों में एक से अधिक विद्युत वितरण एजेंसी हैं, उनमें उपभोक्ता को अपनी रुचि व्यक्त करने की स्वतंत्रता होगी। संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि 2021-22 के बजट में ढांचागत विकास को प्राथमिकता देते हुए रोजगार के नए अवसर देने का वादा किया है। वित्त मंत्री ने किसानों की आय दोगुनी करने का संकल्प दोहराते हुए यह आशा की है कि 2022 तक यह कम से कम डेढ़ गुना तो हो ही जाएगी। वित्त मंत्री ने एक विकासोन्तुख चित्रण प्रस्तुत किया। वर्तमान में वित्त मंत्री के पास न तो करों में छूट देने का विकल्प था और न ही जनमानस की अन्य अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त साधन थे। वर्तमान में इससे बेहतर बजट की संभावना भी नहीं थी।
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